नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक विमानन नेटवर्क पर साफ दिखाई देने लगा है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना या उनके मार्ग बदलना पड़ रहा है। इस स्थिति का सीधा प्रभाव भारत से संचालित होने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के चलते कई एयरलाइंस को अपनी निर्धारित उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। रविवार को कुल 279 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द कर दिया गया, क्योंकि कई प्रमुख विमानन मार्ग संघर्ष प्रभावित क्षेत्र के ऊपर से गुजरते हैं।
खाड़ी देशों से आने वाली उड़ानों पर भी नजर
सरकार ने जानकारी दी है कि 9 मार्च को खाड़ी देशों से भारत आने वाली करीब 50 उड़ानों के संचालन की योजना बनाई गई थी। हालांकि सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए इन उड़ानों के मार्गों की लगातार समीक्षा की जा रही है और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जा रहा है।
तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट से 8 उड़ानें संचालित
तनावपूर्ण हालात के बावजूद तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 9 मार्च को खाड़ी क्षेत्र के लिए आठ उड़ानें संचालित की गईं। इससे यह संकेत मिलता है कि एयरलाइंस सीमित स्तर पर ही सही, लेकिन जरूरी अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। कुछ एयरलाइंस ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सुरक्षित एयर कॉरिडोर का उपयोग शुरू कर दिया है।
लंबे रूट और महंगा हुआ संचालन
संघर्ष के कारण कई विमानों को सामान्य मार्गों की बजाय लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इसके चलते एयरलाइंस की संचालन लागत में भी बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला है, जिससे एयर ट्रैवल सेक्टर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
यात्रियों को दी गई सलाह
एयरलाइंस और संबंधित अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी उड़ानों की स्थिति के बारे में लगातार अपडेट लेते रहें। सुरक्षा हालात में बदलाव के कारण उड़ानों के समय में देरी, मार्ग परिवर्तन या रद्द होने की संभावना बनी हुई है।
